Vidya sagar nautiyal biography for kids
वदयसगर नटयल: उततरखड क सहतयक यदध
जनम: 29 सतबर,
नधन: 18 फरवर,
वदयसगर नटयल उततरखड क ऐस सहतयकर और समजसव थ, जनहन अपन लखन और रजनतक गतवधय स न कवल पहड क सघरष क उजगर कय, बलक समज क एक नई दश दन क परयस कय उनक रचनए समज क शषत वरग, पहड जवन क कठनइय और समजक अनयय क खलफ एक सशकत आवज थ
पररभक जवन और शकष
वदयसगर नटयल क जनम टहर गढवल क भगरथ नद क तट पर सथत मलदवल गव म एक रजगर परवर म हआ उनक पत नरयण दतत, ज एक वन अधकर थ, न पररभक शकष घर पर ह द
शकष:
- हई सकल: परतप इटर कलज, टहर
- इटर: ड.ए.व. कलज, दहरदन
- सनतकततर: कश हद वशववदयलय स अगरज सहतय म एम.ए.
उनहन अपन पढई क सथ-सथ सहतय म गहर रच ल और म लखन करय शर कय
रजनतक जवन
वदयसगर नटयल क रजनतक जवन भ उतन ह पररणदयक ह जतन उनक सहतय
- म गरफतर: 13 वरष क आय म ह उनह समत सरकर न गरफतर कर लय और कलज स नकल दय गय
- उनहन सवततरत सगरम सनन शहद नगनदर सकलन क सथ करय कय
- ऑल इडय सटडटस फडरशन क अधयकष नरवचत हए
- दवपरयग कषतर स उततर परदश क वधन सभ क लए कमयनसट परट क सदसय क रप म चन गए
- उनहन चपक आदलन क समरथन कय और मजदर सघ क मधयम स समजक नयय क लडई लड
सहतयक यगदन
वदयसगर नटयल क सहतय पहड जवन, समजक सघरष और मनवय सवदनओ क आईन ह उनहन अपन लखन म सरल भष और परभव कथनक क उपयग कर समज क समसयओ क उजगर कय
उपनयस
- उलझ रशत
- भम अकल
- सरज सबक ह
- उततर बय ह
- झणड स बछड
- यमन क बग बट
कहन सगरह
- टहर क कहनय
- सचच डर
दस परतनध कहनय
- उमर कद
- खचचर फगण नह हत
- फट ज पचधर
- सचच डर
- भस क कटय
- मट खय जनवर
- घस
- सन
- मलजम अजञत
- सननपत
आतमकथय
- महन गत जएग
समजक यगदन
वदयसगर नटयल न कवल सहतय तक ह समत न रहकर समज क समसयओ क समधन म भ सकरय भमक नभई
- उनहन चपक आदलन क समरथन कर जगल क सरकषण क लडई लड
- मजदर सघ और शरमक आदलन क मधयम स समज म समनत और नयय क लए सघरष कय
वदयसगर नटयल क महतव
उनक रचनए और समज क लए उनक यगदन उततरखड और हद सहतय क लए एक पररण सरत ह उनक कहनय पहड जवन क सघरष क इतन परमणक रप म परसतत करत ह क व आज भ परसगक और पररणदयक ह
वदयसगर नटयल क सहतयक और समजक यतर यह सदध करत ह क एक लखक कवल कलपन तक समत नह हत, बलक समज क बदलन म भ बड भमक नभ सकत ह
"वदयसगर नटयल क सहतय पहड क आतम क आवज ह"
शधमल: वदयसगर नटयल क उपनयस म पहड जवन
गढवल क यथरथ क दसतवज
उनक लखन म गढवल क परकतक सदरय, ससकतक धरहर और रजनतक सघरष समहत ह नटयल न अपन उपनयस म गढवल क कवल भगलक रप म नह, बलक एक जत-जगत समज क रप म परसतत कय ह व पहड और आदम क आपस सबध क इस तरह चतरत करत ह क पठक इनस जडव महसस करत ह
समत वयवसथ और शषण क वरध
नटयल क सहतय म समत वयवसथ और उसस उपज वषमतओ क जकर बर-बर आत ह उनक उपनयस म शषण, भरषटचर और गरब जनत क समसयओ क यथरथ वरणन मलत ह व समत अतयचर क खलफ एक सशकत आवज बनकर उभरत ह
समत शसन दवर उनक परवर क दए गए कषट क बवजद, नटयल न न कवल अपन वयकतगत पड सहन क, बलक इस समज क लए एक पररण क मधयम बनय उनक सहतय इन शषत वरग क सघरष और सपन क शबद दत ह
मखय उपनयस और उनक वशषतए
उलझ रशत ()
यह उनक पहल उपनयस थ, जसम गढवल क गरमण यथरथ क जवत रप स चतरत कय गय ह हलक यह उपनयस अब दरलभ ह चक ह, लकन इसम समज म खए हए वयकततव और उनक सघरष क बड गहरई स दखय गय हभम अकल ()
इसम गढवल क गरमण जदग और उसक सघरष क उकर गय ह उपनयस शहद मलरम क वधव सरम दव क सघरष और सहस क कदर म रखत हसरज सबक ह ()
यह उपनयस मनवत, समनत और समत वयवसथ क वरध पर आधरत ह इसम गढवल क समसयओ क समधन क परत लखक क सकरतमक दषटकण परलकषत हत हयमन क बग बट
यह टहर गढवल म हए जन-वदरह क सतय घटनओ पर आधरत उपनयस ह, ज इतहस और सहतय क अदभत सगम परसतत करत हसवरग ददद! पण-पण
यह उनक अतम उपनयस थ, जसम गढवल क गरमण जवन क वसतर स वरणन ह
कथ और शलप
वदयसगर नटयल क उपनयस म कथवसत गहर और जवत हत ह उनक सवद, वरणन और भष-शल पठक क गढवल क गव-गव म ल जत ह उनक रचनओ म गरमण भरत क सघरष और ससकतक ततव क सदर समयजन ह
नषकरष
वदयसगर नटयल क सहतय न कवल गढवल क जवन क दरशत ह, बलक यह एक ऐस दरपण ह, ज समज क हर कन क सचचई क उजगर करत ह उनक उपनयस म पहड क सघरष, ससकत और मनषय क सवदनओ क सजव चतरण ह उनक सहतय आन वल पढय क लए पररण क सरत बन रहग
पढन क सफरश:
- "भम अकल"
- "यमन क बग बट"
- "सवरग ददद! पण-पण"
वदयसगर नटयल क उपनयस क पढकर गढवल क सघरष और उसक ससकत क करब स समझ ज सकत ह